Tuesday, December 4, 2018

Episode - 03 - अंगुलियों के पौर और गांठ का परिचय

Episode - 03 - अंगुलियों के पौर और गांठ का परिचय

।।जय माता दी।। दोस्तों

आज अंगुलियों के पौरो और गांठो की संख्या,उनकी स्थिति, अंगुलिये के पौर, अंगुलियों के पौरो का तत्व संबंध, अंगुलियों की गांठ और अंगुलियों के गांठो का तत्व संबंध के बारे में चर्चा करेंग या यूं कहूँ की आज आपका मैं अंगुलियों के पौरो और गांठो से परिचय कराऊंगा

मैं डॉ विवेक सुराना, आपका एक बार फिर मेरे Youtube Channel, Micro Palmistry पे हार्दिक स्वागत है।
यदि आप Micro Palmistry - तत्व हस्तरेखा को जानना की जिज्ञासायें रखते है और Micro Palmistry - तत्व हस्तरेखा सीखना चाहते है तोे Videos को लाइक करे, शेयर करे और चेन्नल को Sabuscribe करे।

मेरे दूसरे वाले Video, Episode -2 का इतना अच्छा Response देने के लिए मैं मेरे सभी दोस्तों का तहदिल से शुक्रगुजार हूं

तीसरे Episode में सबसे पहले मैं बात करूंगा अंगुलियों के पौरो और गांठो की,

विषय को आगे बढ़ाता हुआ सबसे पहले बात करूंगा पौर की, पौर क्या होता है, अंगुली को तीन अलग अलग हिस्से में बाटने वाली स्थिति को पौर कहते है।

अब जानेंगे की गांठ क्या है, अंगुलियों के तीन हिस्सों के दो जोड़ बनते है और इन्ही जोड़ो को गांठ कहते है
सामान्यता अंगुली में तीन पोर और दो गांठ होती है जबकि अंगूठे में दो पोर और एक गांठ होती है।
आइए आपको इन पौरो और गांठो की स्थिति और नाम को हस्त बोर्ड पे समझाता हूँ

हर अंगुली में तीन पौर होते है
पहला पौर
दूसरा पौर
तीसरा पौर

जबकी अंगूठे में दो पौर होते है
पहला पौर
दूसरा पौर

हर अंगुली में दो गांठ होती है
पहली गांठ
दूसरी गांठ

और अंगूठे में एक ही गांठ होती है
पहली गांठ

अंगुलियों के अलग अलग पोर और गांठ भी अलग अलग तत्व के संबंध को दर्शाता है और पोर और गांठ की स्थिति को देख कर अंगुली के प्रभाव को पता लगाने में आसानी होती है और फलादेश के क्रम को सटीक तोर पे आगे बढ़ाया जा सकता है।

अब बात करते है कि कोनसा पोर और गांठ कोनसे तत्व को देखते है और पौरो और गांठो को, मैं तत्वों के क्रम से बताऊंगा और आपको उन्हें भी तत्वों के क्रम में ही याद रखना है ऐसा करने से आगे आने वाले विषयो में आपको आसानी रहेगी।

आकाश तत्व - दूसरी गांठ
वायु तत्व - तीसरा पोर
अग्नि तत्व - दूसरी पोर
जल तत्व - पहला पोर
पृथ्वी तत्व - तीनों पोर बराबर होने पे

नोट - पहली गांठ में जल तत्व और अग्नि तत्व का प्रभाव होता है लेकिन बहुत कम लोगो के पहली गांठ बड़ी होती है

जैसे तर्जनी अंगुली का अगर पहला पोर बड़ा हो तो जातक को जल तत्व संबंधी बहुत अच्छे परिणाम मिलते है।

हर बार हर जगह तत्व का कर्म निश्चित रहता है और वो अपने कर्म के हिसाब से ही अपना फल देता है।

तत्व हस्तरेखा में पौर की स्थिति, स्थान और लंबाई को समझने से जातक की प्रकृति के अलावा जो परिवर्तन दिखता है उसे समझने में आसानी होती है इसके अलावा जातक किस विशेष क्षेत्र में भी विशिष्ट क्षेत्र में सबसे अच्छा होगा ये समझने में आसानी देता है।

जैसे जातक डॉक्टर है लेकिन डॉक्टर में भी किसका विशेषज्ञ होगा या expert होगा ये सब भी अंगुलियों के पौरो से समझने में आसानी रहती है।

एक उदाहरण से मैं इस बात को और ज्यादा clear कर दु जैसे किसी जातक की अगर कनिष्ठा अंगुली बड़ी है तो वो जातक अच्छा डॉक्टर बन सकता है और अंगुली के साथ साथ अगर दूसरी गांठ भी बड़ी है तो ऐसा जातक स्त्रीरोग और यौन रोग विशेषज्ञ बनता है।

आज के Episode में मैने आपका अंगुलियों के पौरो और गांठो से परिचय करवाया और अगले Episode में, मैं अंगुलियों के छाप और अलग अलग छापो के तत्व सम्बंध के बारे में चर्चा करूंगा।

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।।जय माता दी।।


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