Episode - 02 - अंगुलियों का परिचय
।।जय माता दी।। दोस्तों
आज अंगुलिये के नाम, स्थिति, अंगुलियों के ग्रह संबंध, अंगुलियों का तत्व संबंध और अंगुलियों की लंबाई के बारे में चर्च करेंग या यूं कहूँ की आज आपका मैं अंगुलियों से परिचय कराऊंगा
मैं डॉ विवेक सुराना, आपका एक बार फिर मेरे Youtube Channel, Micro Palmistry पे हार्दिक स्वागत है।
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मेरे पहले वाले Video, Episode -1 का इतना अच्छा Response देने के लिए मैं मेरे सभी दोस्तों का तहदिल से शुक्रगुजार हूं
दूसरे Episode में सबसे पहले मैं बात करूंगा अंगुलियों के परिचय की,
सबसे पहले अंगुलियों के नाम और उनके स्थान की चर्चा करेंगे, आइए इसको हस्त बोर्ड पे समझे
ये है अंगूठा
उसके बाद तर्जनी
फिर उसके बाद मध्यमा
फिर उसके बाद अनामिका
और सबसे आखिर में है कनिष्ठा
इनके नाम और स्थान निश्चित है इनमें कभी कोई बदलाव की गुंजाइश नही है
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए जानेंगे की कौनसी अंगुली से कोनसे ग्रह का संबंध है, आइए इसे हस्त बोर्ड पे समझे
सबसे पहले अंगूठा, जिसका शुक्र से संबंध है
उसके बाद तर्जनी अंगुली, जिसका गुरु से संबंध है
फिर उसके बाद मध्यमा अंगुली, जिसका शनि से संबंध है
फिर उसके बाद अनामिका अंगुली, जिसका सूर्य से संबंध है
और सबसे आखिर में है कनिष्ठा अंगुली, जिसका बुध से सम्बंध है
अलग अलग अंगुलियों से अलग अलग ग्रहों के प्रभाव को समझा जाएगा।
अंगुलियों के ग्रह संबंध के बाद बात करेंगे अंगुलियों के तत्व संबंधों पे
हमारे हाथो की पांचों अंगुलियां, पंचतत्व की प्रतीक है और इसी सिद्धान्त के हिसाब से भारत में हाथो से खाना खाने का प्रचलन है और जिसकी वजह से शरीर को पंचतत्व का पोषण मिलता है, यंहा तक की प्राचीन भारत मे जितने भी काम अंगुलियों से किये जाते थे उन सभी मे येही पंचतत्व विज्ञान ही काम करता है, अलग अलग अंगुली अलग अलग तत्वों को देखती है और उन तत्वों का पोषण करती है।
कौनसी अंगुली से कोनसे तत्व का पोषण होता है ये सबसे पहले समझ ले और इन्हें याद रखे क्योंकि ये बाते आगे बार बार काम आएगी और इन्हें में पंचतत्वों के क्रम से ही बताऊंगा और आपको भी इसी क्रम में याद रखना है आइए इसको भी हस्त बोर्ड पे समझे
सबसे पहले आकाश तत्व और इसे अंगूठे से देखेंगे
उसके बाद वायु तत्व और इसे मध्यमा अंगुली से देखेंगे
फिर उसके बाद अग्नि तत्व और इसे अनामिका अंगुली से देखेंगे
फिर उसके बाद जल तत्व और इसे तर्जनी अंगुली से देखेंगे
और सबसे आखिर में पृथ्वी तत्व और इसे कनिष्ठा अंगुली से देखेंगे
अलग अलग अंगुली में अलग अलग तत्वों के प्रधान गुण होते है और ये अंगुलियाँ हमेशा अपने तत्वों से संबंधित जानकारी ही सिर्फ देती है, ये था अंगुलियों और तत्वों का संबंध
यंहा एक बात मैं क्लियर कर देना चाहता हूं ताकि आपको कभी कंफ्यूज़न न हो अंगुलिया का जो मैंने तत्व संबंध बताया है वो मुद्रा विज्ञान से अलग है तो यंहा पे आपको सिर्फ Micro Palmistry के तत्व संबंध को ध्यान रखना है।
अब चर्चा करेंगे अंगुलियों की लंबाई पे और अंगुलियों की लंबाई को ले कर चल रहे भ्रम को दूर करने की कोशिस करूंगा और अंगुलियों को सबसे छोटी से बड़ी अंगुली के क्रम को बताएंगे।
सबसे छोटी कनिष्ठा, कनिष्ठ से बड़ा अंगूठा, और अंगूठे से बड़ी अनामिका, और अनामिका से बड़ी तर्जनी और तर्जनी से बड़ी या सबसे बड़ी मध्यमा अंगुली होती है इसको इसी क्रम में याद रखना है।
कनिष्ठा अंगुली, अनामिका की पहली गांठ तक या पहले पोर के आधार तक कम से कम होनी चाहिए उसके बाद सभी अंगुलिया क्रमानुसार बड़ी होनी चाहिए
Micro Palmistry - तत्व हस्तरेखा में अंगुलियों के अपने अनुपात से छोटा, बड़ा और सम होना जातक के फलादेश को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है इसलिए ये अंगुलियों के कर्मानुसार लंबाई का ध्यान रखना जरूरी है नही तो फलादेश कभी भी सटीक नही हो पायेगा।
जैसे आपकीं अनामिका अंगुली अपने अनुपात से बड़ी है या तर्जनी अंगुली से बड़ी है तो आप मे अग्नि तत्त्व के प्रभाव सकारात्मक होगा लेकिन जल तत्व का प्रभाव नकारात्मक भी होगा।
आज के Episode में मैने आपका अंगुलियों से परिचय करवाया और अगले Episode में मैं अंगुलियों के पौर और पौरो के तत्व संबंध पे बारे में चर्चा करूंगा।
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।।जय माता दी।।
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